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पटमंजरी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पटमंजरी संज्ञा पुं॰ [सं॰ पटपञ्जरी] संपूर्ण जाति की एक शु्द्घ रागिनी जो हिंडोल राग की स्त्री है । विशेष—हनुमत के मत से इसका स्वरग्राम यह है—प ध नि सा रे ग म प । इसका गान समय दंड से १०दंड तक है । एक और मत से यह श्री राग की रागिनी हैं । और इसका गान समय एक पहर दिन के बाद हैं । कोई कोई इसे संकर रागिनी भी मानते हैं । इसमें से कुछ के मत से यह नट और मालश्री के मिलाने से बनी हैं । दूसरे इसे मारू, धूलश्री, गांधारी और धनाश्री के संयोग से बनी हुई मानते हैं ।