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पटा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पटा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पट] प्रायः दो हाथ लंबी किर्च के आकार की लोहे की फट्टी जिससे तलवार की काट और बचाव सीखे जाते हैं । उ॰—पटा पवड़िया ना लहै, पटा लहै कोई सूर ।— दरिया॰, पृ॰ १५ ।

पटा पु ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पट्ट] पीढ़ा । पटरा । उ॰—चौकी पीढ़ी पटा झारी पनिगह, पलइठि तेआए आसन ।—वर्ण- रत्नाकर, पृ॰ १२ । मुहा॰—पटाफेर = विवाह की एक रस्म जिसमें वर वधू के आसन परस्पर अदल बदल दिए जाते हैं । पटा बाँधना = पटरानी बनाना । उ॰—चौदह सहस तिया में तोको पटा बँधाऊँ आज ।—सूर (शब्द॰) ।

२. (पट की तरह समतल होने के कारण) गंडस्थल । जैसे, कनपटा, कनपटी । यौ॰—पटाझर ।

पटा पु ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पट्ट]

१. अधिकारपत्र । सनद । पट्टा । उ॰—(क)विधि के कर को जो पटो लिखि पायो ।— तुलसी (शब्द॰) । (ख) सतगुरु साह साध सौदागर भक्ति पटो लिखवइयो हो ।—धरम॰, पृ॰ ११ ।

२. पगडी़ या कलँगी की तरह का एक भूषण जो पहले राजाओं द्वारा किसी विशिष्ट कार्य में, सफलता प्राप्त करने या श्रेष्ठ वीरता- प्रदर्शन पर सामंतों को दिया जाता था । उ॰—सिर पटा छाप लोहान होइ । लग्गें सु सरह सय पाइ लोइ ।—पृ॰ रा॰, ४ ।१५ ।

पटा पु ^४ संज्ञा पुं॰ [हिं पटना] लेन देन । क्रय विक्रय । सौदा । उ॰—मन के हटा में पुनि प्रेम को पटा भयो ।—पद्माकर (शब्द॰) ।

पटा ^५ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰]

१. चौड़ी लकीर । धारी ।

२. लगाम की मुहरी ।

३. चटाई ।

४. दे॰ 'पट्टा' ।