पटेरहिं
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पटेरहिं लागत बार । अस कछु कीनों नंदकुमार ।—नंद ग्रं॰, पृ॰ २५८ । विशेष—इसके पत्ते प्रायः एक इंच चौड़े और पाँच फुट तक लंबे होते हैं । पत्ते बहुत मोटे होते हैं और पत्तों में ये नए पत्ते निकलते हैं । इन पत्तों से चटाइयाँ आदि बनाई जाती हैं । इसमें बाजरे की बाल की तरह बालें लगती हैं, जिनके दानों का आटा सिंध देश के दरिद्र निवासी खाते हैं । वैद्यक में यह कसैली, मधुर, शीतल, रक्तपित्तनाशक और मूत्र, शुक्र, रज तथा स्तनों के दूध को शुद्ध करनेवाली मानी जाती है । पर्या॰—गुंद्रु । पटेरक । रच्छ् । श्रृंगवेराभमूलक ।