पट्टीदारी
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पट्टीदारी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ पट्टीदार]
१. पट्टी होने का भाव । बहुत से हिस्से होना । किसी वस्तु का अनेक की संपत्ति होना । जैसे,—इस गाँव में तो खासी पट्टीदारी है ।
२. पट्टीदार होने का भाव । बराबर अधिकार रखने का भाव । हिस्सेदारी । मुहा॰—पट्टीदारी अटकना = ऐसा झगड़ा उपस्थित होना जिसका कारण पट्टी हो । पट्टीदारी विषयक या पट्टीदारी के कारण कोई झगड़ा खड़ा होना । पट्टीदारी के कारण विरोध होना । जैसे,—मेरे अपके कोई पट्टीदारी थोड़े ही अटकी है । पट्टीदारी करना = (१) किसी के बराबर अधीकार जताना । पट्टीदार होने के कारण किसी के काम में रुकावट करना । पट्टीदारी के बल पर किसी का विरोध करना । पट्टीदारी के हक पर अड़ना । जैसे,—आप तो बात बात में पट्टीदारी करते हैं । (२) बराबरी करना । जो कोई एक करे उसे आप भी करना ।
३. वह जमींदारी जो एक ही मूल पुरुष के उत्तराधिकारियों या उनके नियत किए हुए व्यक्तियों की संयुक्त हो । वह जमींदारी जिसके बहुत से मालिक होने पर भी जो अविभक्त संपत्ति समझी जाती हो । भाई चारा । विशेष—पट्टीदारी जमींदारी में अनेक विभाग और उपविभाग होते हैं । प्रधान विभाग को 'थोक' और उसके अंतर्गत उपविभागों को 'पट्टी' कहते हैं । प्रत्येक पट्टी का मालिक अपने हिस्से की जमीन की स्वतंत्र व्यवस्था करता है और सरकारी कर देता है । पर किसी एक पट्टी में मालगुजारी बाकी रह जाने पर वह सारी जायदाद से वसुल की जा सकती है । प्राय: प्रत्येक थोक में एक एक 'लंबरदार' होता है । जिस पट्टीदारी की सारी जमीन हीस्सेदारों में बँट गई हो उसे मुकम्मल या पूर्ण पट्टीदारी और जिसमें कुछ जमीन तो उनमें बाँट दी गई हो पर कुछ सरकारी कर और गाँव की व्यवस्था का खर्च देने के लिये साझे में ही अलग कर ली गई हो उसे नामुकम्मल या अपूर्ण पट्टीदारी कहते हैं । नामुकम्मल पट्टीदारी में जब कभी अलग की हुई जमीन का मुनाफा सरकारी कर देने के लिये पूरा नहीं पड़ता तब पट्टीदारों पर अस्थायी कर लगाकर वह पूरा किया जाता है ।