पठङ्गा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पठंगा † संज्ञा पुं॰ [देश॰] अवलंब । आश्रय । सहारा । उ॰— तीन लोक रिसियाय सकल सुरनर और नारि । मोर न बाँकै बार पठंगा पावा भारी ।—पलटू॰, भा॰ १, पृ॰ ५ ।
पठंगा † संज्ञा पुं॰ [देश॰] अवलंब । आश्रय । सहारा । उ॰— तीन लोक रिसियाय सकल सुरनर और नारि । मोर न बाँकै बार पठंगा पावा भारी ।—पलटू॰, भा॰ १, पृ॰ ५ ।