पठानीलोध
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पठानीलोध संज्ञा पुं॰ [सं॰ पट्ठिकालोध्र] एक जंगली वृक्ष जिसकी लकड़ी और फूल औषध के और पत्तियाँ और छाल रंग बनाने के काम में आती हैं । विशेष—यह उगाया या रोपा नहीं जाता, केवल जंगली रूप में पाया जाता है । इसकी छाल को उबालने से एक प्रकार का पीला रंग निकलता है जो कपड़ा रँगने के काम में लाया जाता है । बिजनौर, कुमाऊँ और गढ़बाल के जंगलों में इसके वृक्ष बहुतायत से पाए जाते हैं । चमड़े पर रंग पक्का करने और अबीर बनाने में भी इसकी छाल का उपयोग किया जाता है । लोध के दो भेद होते हैं । एक को 'पठानी लोध' और दुसरे को केवल 'लोध' कहते है । औषध के काम में 'पठानी लोध' ही अधिक आता है । दोनों लोधों को वैद्यक में कसैला, शीतल, वातकफनाशक, नेत्रहितकारी, रुधिर और विष के विकारों का नाशक कहा है । लोध का फूल कसैला, मधुर, शीतल, कड़ुवा, ग्राहक और कफ- पित्तनाशक माना गया हैं । पर्या॰—पट्टिकालोध्र । क्रमुक । स्थूलवल्कल । जीर्णपत्र । बृहत्पत्र । पट्टी । लाद्राप्रसादन । पट्टीकाख्य । पट्टीलोध्र । पट्टिका । पट्टिलोध्रक । वल्कलोध्र ।, बृहद्दल । जीर्णबुध्न । बृहदुल्क । शीर्णपत्र । आद्राप्रसाद । वल्क ।