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पढ़िना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पढ़िना संज्ञा पुं॰ [सं॰ पाठीन] एक प्रकार की बिना सेहरे की मछली जो तालाव और समुद्र सभी स्थानों में पाई जाती है । विशेष—यह मछली प्रायः अन्य सब मछलियों से अधिक दीर्घ- जीवी और डील डौलवाली होती है । किसी किसी पढ़िने का वजन दो मन से भी अधिक होता है । यह मांसाशी है और मछलियों के अतिरिक्त अन्य छोटे छोटे जीव जंतिओं को भी निगल लिया करती है । इसकी सारे शरीर के मांस में बारीक बारीक काँटे होते हैं जिन्हें दाँत कहते हैं । वैद्यक में इसे कफ पित्तकारक, बलदायक, निद्राजनक, कोढ़ और रक्तदोष पैदा करनेवाला लिखा है । पर्या॰—पाठीन । सहस्त्रदंष्ट्र । बोदालक । वदालक । पढ़ना । पहीना ।