पतरज
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पतरज संज्ञा पुं॰ [सं॰ पत्रज] तेजपात । पत्रज । उ॰—अजमोंदा चितकरना पतरज बायभिरंग । सेंधा सोंठ त्रीफला, नासहि मारुत अंग ।—इंद्रा॰, पृ॰ १५१ ।
पतरज संज्ञा पुं॰ [सं॰ पत्रज] तेजपात । पत्रज । उ॰—अजमोंदा चितकरना पतरज बायभिरंग । सेंधा सोंठ त्रीफला, नासहि मारुत अंग ।—इंद्रा॰, पृ॰ १५१ ।