पतिग
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पतिग पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ पातक] पाप । कल्मष । उ॰—गंगा गया छै तीरथ योग, वाणारसी तिहाँ परसजे, तिणि दरसण जाई पतिग न्हासि ।—वी॰ रासो, पृ॰ ३५ ।
पतिग पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ पातक] पाप । कल्मष । उ॰—गंगा गया छै तीरथ योग, वाणारसी तिहाँ परसजे, तिणि दरसण जाई पतिग न्हासि ।—वी॰ रासो, पृ॰ ३५ ।