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पत्रभङ्ग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पत्रभंग संज्ञा पुं॰ [सं॰ पत्रभङ्ग]

१. वे चित्र या रेखाएँ जो सौदर्य- वृद्धि के लिये स्त्रियाँ, कस्तूरी, केसर, आदि के लेप अथवा सुनहले, रुपहले पत्तरों के टुकड़ों से भाल, कपोल, आदि पर बनाती हैं । माथे और गाल पर की जानेवाली चित्रकारी अथवा बेलबूटे । साटी ।

२. पत्रभंग बनाने की क्रिया ।