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पथरकला

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पथरकला संज्ञा पुं॰ [हिं॰ पत्थर या पथरी + कल] एक प्रकार की बंदूक या कड़ाबीन जो चकमक पत्थर के द्वारा अग्नि उत्पन्न करके चलाई जाती थी । वह बंदूक जिसकी कल वा घोड़े में पथरी लगी रहति हो । इस प्रकार की बंदूक का व्यवहार पहले होता था ।