पदचतुरर्घ
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पदचतुरर्घ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पदचतुरर्द्ध] विषम वृत्तों का एक भेद जिसके प्रथम चरण में ८, दूसरे में १२, तीसरे में १६ और चौथे में २० वर्ण होते हैं । इसमें गुरु लघु का नियम नहीं होता । इसके अपीड़, प्रत्यापीड़, मंजरी, लवली, और अमृत- धारा ये पाँच अवांतर भेद होते हैं ।