पदपाट
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पदपाट संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. वेदमंत्रों का ऐसा पाठ जिसमें सभी पद अलग अलग करके कहे जायँ ।
२. ग्रंथ जिससे पदपाठ हो [को॰] ।
पदपाट संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. वेदमंत्रों का ऐसा पाठ जिसमें सभी पद अलग अलग करके कहे जायँ ।
२. ग्रंथ जिससे पदपाठ हो [को॰] ।