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पदमैत्री

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पदमैत्री संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] किसी कविता में एक ही शब्द या अक्षर का इस प्रकार बार बार आना जिसमें उसमें एक प्रकार का चमत्कार आ जाय । अनुप्रास । वणांमैत्री । वर्णसाम्य । जैसे, मल्लिकान मंजुल मलिंद मतवारे मिले मंद मंद मारुत मुहीम मनसा की है ।—(शब्द॰) ।