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पनरह

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पनरह वि॰ [सं॰ पञ्चदश] दे॰ 'पंद्रह' । उ॰—पनरह दिनहूँ जागती, प्रीसूँ प्रेम करंत । एक दिवस निद्रा सबल सूती जाणि निचंत ।— ढेला॰, दू॰ ३४२ ।