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पनारा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पनारा संज्ञा पुं॰ [सं॰ प्रणालि] दे॰ 'परनाला' । उ॰—रहट चलत वा ग्राम तहँ, ठहरत प्रीति अपार । लगे पनारे रहट के, परत अखंडित धार ।—प॰ रासो॰ पृ॰ २३ ।