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पन्थकी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पंथकी पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ पथिक] राही । पथिक । राह चलता मुसाफिर । उ॰—(क) मँदिरन्ह जगत दीप परगसी । पंथकि चलत बसेरन बसी ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) कौन हौ ? किततें चले ? कित जात हौ ? केहि काम ? जू । कौन की दुहिता, बहू कहि कौन की यह बाम, जू । एक गाँव रहौ कि साजन मित्र बंधु बखानिए । देश के ? परदेश के ? किधों पंथकी ? पहिचानिए ।—केशव (शब्द॰) ।