पयाल
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पयाल ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पाताल प्रा॰ पयाल] दे॰ 'पाताल' । उ॰— सब सुख सरग पयाल कै, तोल तराजू बाहि । हरि सुख एक पलक्क का, ता सम कह्या न जाइ ।—संतवानी॰, पृ॰ ७८९ ।
पयाल ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पलाल] धान, कोदो, आदि के सूखे डंठल जिसके दाने झाड़ लिए गए हों । पुराल । मुहा॰—पयाल गाहना या झाड़ना = (१) ऐसा श्रम करना जिसका कुछ फल न हो । व्यर्थ मिहनत करना । उ॰— फिरि फिरि कहा पथ गहि गाहे ।—सूर (शब्द॰) । (२) ऐसे की सेवा कराना या ऐसे को घेरना जिससे कुछ मिलने की आशा न हो ।