परकना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]परकना पु † क्रि॰ अ॰ [हिं॰ परचना]
१. परचना । हिलना । मिलना ।
२. जो बात दो एक बार अपने अनुकूल हो गई हो या जिस बात को कई बार बे रोकटोक कर पाए हों उसकी ओर प्रवृत्त होना । धड़क खुलना । अभ्यास पड़ना । चसका लगना । उ॰—माखन चोरी सों अरी परकि रह्यो नँदलाल । चोरन लाग्यो अब लखौ नेहिन को मनमाल ।—रसनिधि (शब्द॰) ।