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परगाछा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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परगाछा संज्ञा पुं॰ [हिं॰ पर ( = दूसरा) + गाछ ( = पेड़)] एक प्रकार के पौधे जो प्रायः गरम देशों में दूसरे पेड़ों पर उगते हैं । विशेष—इनकी पत्तियाँ लंबी और खड़ी नसों की होती हैं । फूल सुंदर तथा अद्भूत वर्ण और आकृति के होते हैं । एक ही फूल में गर्भकोश और परागकेसर दोनों होते हैं । परगाछे की जाति के बहुत से पौधे जमीन पर भी होते हैं और फूलों की सुंदरता के लिये बगीचों में प्रायः लगाए जाते है । ऐसे पौधे दूसरे पेड़ों की डालियों आदि पर उगते अवश्य हैं, पर सब परपुष्ट (दूसरे पेड़ों के रस धातु से पलनेवाले) नहीं होते । परगाछे की कोई टहनी या गाँठ भी बीज का काम देती है, उससे भी नया पौधा अंकुर फोड़कर (गन्ने की तरह) निकल आता है । परगाछे को संस्कृत में बंदाक और हिंदी में बाँदा भी कहते हैं ।