परचना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]परचना क्रि॰ अ॰ [सं॰ परिचयन]
१. किसी को इतना अधिक जानबूझ लेना कि उससे व्यवहार करने में कोई संकीच या खटका न रहे । हिलना मिलना । घनिष्टता प्राप्त करना । जैसे,—(क) बच्चा जब परच जायगा तब तुम्हारे पास रहने लगेगा । (ख) परच जाने पर यह तुम्हारे साथ साथ फिरेगा ।
२. जो बात दो एक बार अपने अनुकूल हो गई हो या जिस बात के दो एक बार बे रोकटोक मनमाना । करने पाए हों उसकी ओर प्रवृत्त रहना । चसका लगना । धड़क खुलना । टेव पड़ना । जैसे,—इसे कुछ न दो, परच जायगा तो नित्य आया करेगा । संयो॰ क्रि॰—जाना ।
३. व्यक्त होना । प्रगट होना । पहचाने जाना ।