परचै
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]परचै संज्ञा पुं॰ [सं॰ परिचय] दे॰ 'परिचय', 'परचा' । उ॰—परचै चक्र काया में सोई । जो ऊगै तौ सब सुख होई ।—कबीर सा॰, पृ॰ ८७९ ।
परचै संज्ञा पुं॰ [सं॰ परिचय] दे॰ 'परिचय', 'परचा' । उ॰—परचै चक्र काया में सोई । जो ऊगै तौ सब सुख होई ।—कबीर सा॰, पृ॰ ८७९ ।