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परछा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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परछा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ प्राणिच्छद]

१. वह कपड़ा जिससे तेली कोल्हू के बैल की आँखों में अँधोटी बाँधते हैं ।

२. जुलाहों की नली जिसपर वे सूत लपेटते हैं । सूत की फिरकी । घिरनी ।

परछा ^२ संज्ञा पुं॰ [?] [स्त्री॰ अल्पा॰ परछी]

१. बड़ी बटलोई । बड़ा देग ।

२. कड़ाई । कढा़ई ।

३. मिट्टी का मझोला बरतन ।

परछा ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰ परिच्छेद] बहुत सी वस्तुओँ के घने समूह में से कुछ के निकल जाने से पड़ा हुआ अवकाश । विरलता । छीड़ ।

२. घनेपन या भीड़ की कमी । भीड़ का छटाव । क्रि॰ प्र॰—करना ।—होना ।

३. समाप्ति । निबटेरा । चुकाव । फैसला । क्रि॰ प्र॰—करना ।—होना ।