परजंक
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]परजंक संज्ञा पुं॰ [सं॰ पर्यङ्क] उ॰—उतरत कहुँ परजंक तै पग द्वै धरत संसक । कुम्हलान्यौं अति ही परत आतप बदन मयंक ।—स॰ सप्तक, पृ॰ ३५४ ।
परजंक संज्ञा पुं॰ [सं॰ पर्यङ्क] उ॰—उतरत कहुँ परजंक तै पग द्वै धरत संसक । कुम्हलान्यौं अति ही परत आतप बदन मयंक ।—स॰ सप्तक, पृ॰ ३५४ ।