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परिचार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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परिचार संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. सेवा । टहल । खिदमत ।

२. सेवक । टहलुआ । उ॰—तजि कुलगामि को निसंक होय क्यों न करे बेगि मृगगैनी अनुकंपा परिचार पै ।—मोहन॰, पृ॰ १०३ ।

३. वह स्थान जो टहलने या घूमने फिरने के लिये निर्दिष्ट हो ।