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परिभ्रम

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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परिभ्रम संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. इधर उधर टहलना । घूमना । भटकना पर्यटन । भ्रमण ।

२. घुमा फिराकर कहना । सीधे सीधे न कहकर और प्रकार से कहना । किसी वस्तु के प्रसिद्ध नाम को छिपाकर उपयोग, गुण, संबंध आदि से उसका संकेत करना । जैसे, पत्र (चिट्ठी) को 'बकरी का भोज्य' या 'माता' को पिता की 'पत्नी' कहना ।

३. भ्रम । भ्रांति । प्रमाद ।