परिमर्श
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]परिमर्श संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ परिमृष्ट ]
१. छू जाना । लग जाना । लगाव होना । स्पर्श होना ।
२. अच्छी तरह विचार करना । सोचना । किसी बात को सब पक्षों पर विचार करना ।
परिमर्श संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ परिमृष्ट ]
१. छू जाना । लग जाना । लगाव होना । स्पर्श होना ।
२. अच्छी तरह विचार करना । सोचना । किसी बात को सब पक्षों पर विचार करना ।