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परिवह

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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परिवह संज्ञा पुं॰ [सं॰] सात पवनों में से छठा पवन । विशेष—कहते हैं, यह सुबह पवन के ऊपर रहता है और आकाशगंगा को बहाता तथा शुक्र तारे को घुमाता है । उ॰—है याकी वह पवन जो परिवह जाति कहाय । वही पवन नभगंग कों नितप्रति रही बहाय ।—शकुंतला, पृ॰ १३३ ।

२. अग्नि की सात जीभों में से एक ।