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परिहत

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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परिहत ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ मि॰ (वैदिक) पराहत (= जुता हुआ)]

१. हल के अंतिम और मुख्य भाग की वह सीधी खड़ी लकड़ी जिसमें ऊपर की ओर मुठिया होती है और नीचे की ओर हरिस तथा तरेली या चौभी ठुँकी रहती है । नगरा ।

२. वह नगरा जिसमें तरेली की लकड़ी अलग से नहीं लगानी पड़ती किंतु जिसका निचला भाग स्वयं ही इस प्रकार टेढा़ होता है कि उसी को नोकदार बनाकर उसमें फाल ठोंक दिया जाता है ।

परिहत ^२ वि॰ [सं॰]

१. मृत । मुरदा । नष्ट । मरा हुआ ।

२. शिथिल । अस्तव्यस्त । ढीला ढाला । उ॰—कौन कौन तुम परिहतवसना म्लानमना, भूपतिता सी, ।—पल्लव, पृ॰ ६६ ।