पर्णकृच्छ
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पर्णकृच्छ संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. एक व्रत जिसमें पहले दिन ढाक के पत्तों का, दूसरे दिन गूलर के पत्तों का, तीसरे दिन कमल के पत्तों का और चौथे दिन बेल के पत्तों का क्वाथ पीकर पांचवें दिन कुश का जल पिया जाता है ।
२. प्राचीन काल का एक प्रकार का व्रत जो गूलर, बेल, कुश आदि के पत्ते खाकर या इनके काढे़ पीकर रहने से होता था ।