पर्यय
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पर्यय संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. शास्त्र अथवा लोकाचारविहित । किसी नियम या क्रम का उल्लंघन । विपर्यय । गड़बड़ी ।
२. व्यतीत होना । बीतना । नष्ट होना (समय के लिये) ।
३. विनाश । नाश (को॰) ।