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पर्यस्तापह्नुति

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पर्यस्तापह्नुति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] वह अर्थलंकार जिसमें वस्तु का गुण गोपन करके उस गुण का किसी दूसरे में आरोपित किया जाना वर्णन किया जाय । जैसे,— नहीं शक्र सुरपति अहै सुरपति नंदकुमार । रतनाकर सागर न है, मथुरा नगर बाजार । दे॰ 'अपह्नुति' ।