पलक

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पलक संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पल + क]

१. क्षण पल । लहमा । दम । उ॰— कोटि कर्म फिरे पलक में जो रेचक आए नाँव । अनेक जन्म जो पुन्य करे नहीं नाम बिनु ठाँव ।— कबीर (शब्द॰) ।

२. आँख के ऊपर का चमडे़ का परदा जिसके गिरने से आँख बंद होती और उठने से खुलती है । पपोटा तथा बरोनी । उ॰— लोचन गमु रामहिं उर आनी । दीन्हें पलक कपाट सयानी ।— तुलसी (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰— गिरना । झपकना । मुहा॰—पलक खोलना = आँख खोलना । उ॰— इन दिनों तो है बिपत खुल खेलती । तू भला अब भी पलक तो खोल दे ।— चुभते॰, पृ॰ १ । पलक झपकते = अत्यंत अल्प समय में । बात कहते । एक निमेष मात्र में । जैसे,— पलक झपकते पुस्तक गायब हो गई । पलक पर लेना = जी खोलकर संमान करना । अत्यंत प्रेम से सम्मान करना । उ॰— लालसा लाख बार होती है । हम पलक पर उन्हें ललक ले लें । चुभते॰, पृ॰ ७ । पलक पसीजना = (१) आँखों में आँसू आना । (२) दया या करुणा उत्पन्न होना । द्रवित होना । आर्द्र होना । पलक पाँवडे़ बिछाना = हार्दिक स्वागत करना । उ॰— आइए ऐ मिलाप के पुतले, हम पलक पाँवडे़ बिछ ा देंगे । चुभते॰, पृ॰ ६ । (किसी के रास्ते में या किसी के लिये पलक बिछाना = किसी का अत्यंत प्रेम से स्वागत करना पूर्ण योग से किसी का स्वागत तथा सत्कार करना । उ॰— ऊबता हूँ उबारनेवाले । आइए हैं बिछी हुई पलकें ।— चुभते॰, पृ॰ १ । पलक भँजना =(१) पलक का गिरना या हिलना । (२) पलक का इस प्रकार हिलना कि उससे कोई संकेत सूचित हो । इशारा या संकेत ह्वोना । जैसे,— उनकी पलक भँजते ही वह नौ दो ग्यारह हो गया । पलक भाँजना = (२) पलक से कोई इशारा करना । पलक मारना = (१) आँखों से संकेत या इशारा करना । (२) पलक झपकाना था गिराना । (३) तंद्रालु होना । झपकी लेना । पलक लगना = (१) आँखें मुँदना । पलक झपकना । पलक गिरना । उ॰— पलक नहिं कहुँ नेकु लागति रहति इक टक हेरि । तऊ कहुँ त्रिपितात नहीं रूप रस के ढेरि ।— सूर (शब्द॰) । (२) नींद आना । झपकी लगना । जैसे,—आज तीन दिन से एक छन के लिये भी पलक न लगी । पलक लगना = (१) आँख झपकाना । आँखें मूँदना । (२) सोने के लिये आँखें बंद करना । सोने की इच्छा से आँखे मूँदना । पलक से पलक न लगना = (१) पलक न झपकना । टकटकी बँधी रहना । (२) आँख न लगना । नींद न आना । पलक से पलक न लगाना = (१) टकटकी बाँधे रहना । पलक न झपकाना । (२) सोने के लिये आँखें बंद न करना । पलकों से तिनके चुनना = अत्यंत श्रद्धा तथा भक्ति से किसी की सेवा करना । किसी को सुख पहुँचाने के लिये पूर्ण मनोयोग से प्रयत्न करना । जैसे,— मैं आपके लिये पलकों से तिनके चुनूँगा । पलकों से जमीन झाड़ना = पलकों से तिनके चुनना ।