पला
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पला ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पल] पल । निमिष ।
पला पु ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पटल]
१. तराजू का पलड़ा । पल्ला । उ॰— बरुनी जोती पल पला, डाँड़ी भौंह अनूप । मन पसंग तौलै सुदृग, हरुवौ गरुवौ रूप ।— रसनिधि (शब्द॰) ।
२. पल्ला । आंचल । उ॰— समुझि बूझि दृढ़ ह्वै रहै, बल तजि निर्बल होय । कह कबीर ता सेत को पला न पकडै़ कोय ।— कबीर (शब्द॰) ।
३. पार्श्व । किनारा । उ॰— नासिक पुल सरात पथ चला । तेहि कर भौंहैं हैं दुइ पला ।— जायसी (शब्द॰) ।
पला ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ पली] तेल की पली ।