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पसङ्गा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पसंगा † ^१ संज्ञा पुं॰ [फा़॰ पासंग]

१. वह बोझ जिसे तराजू के पल्लों का बोझ बराबर करने के लिये तराजू की जोती में हलके पल्ले की तरप बाँध देते हैं । पासंग ।

२. तराजू के दोनों पल्लों के बोझ का अंतर जिसके कारण उस तराजू पर तौली जानेवाली चीज की तौल में भी उतना ही अंतर पड़ जाता है ।

पसंगा † ^२ वि॰ बहुत ही थोड़ा । बहुत कम । मुहा॰—पसंगा भी न होना = कुछ भी न होना । बहुत ही तुच्छ होना । जैसे,—यह कपड़ा उस थान का पसंगा भी नहीं है ।