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पाँचर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पाँचर संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पञ्जर]

१. कोल्हू के बीच में जडे़ हुए लकडी़ के वे छोटे छोटे टुकडे जो गन्ने के टुकडे़ को दबाने में जाठ के सहायक होते हैं । जाठ और पाँचर के बीच में दबने से ही गन्ने के टुकड़ों में से रस निकलता है ।

२. दे॰ 'पच्चर' ।