सामग्री पर जाएँ

पाटली

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

पाटली ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. पाडर ।

२. पांडुफली ।

३. पटना नगर की अधिष्ठात्री देवी ।

४. गाधि की पुत्री जिसके अनुरोध से पाटलीपुत्र बसा । यौ॰—पाटलीपुत्र = पाटलिपुत्र ।

पाटली ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ पाट] लकडी़ की एक बल्ली जिसमें बहुत से छेद होते हैं और प्रत्येक छेद में से मस्तूल की एक एक रस्सी निकाली जाती है । इससे रात में किसी विशेष रस्सी को अलग करने में कठिनाई नहीं पडती । (लश॰) ।

पाटली तैल संज्ञा पुं॰ [सं] एक औषध तैल जिसके लगाने से जले हुए स्थान की जलन, पीडा़ और चेप बहना दूर होता है । इससे चेचक की भी शांति होती है । विशेष—इसके बनाने की विधि इस प्रकार है—पाडर या पाढर की छाल के ८ सेर का ६४ सैर पानी में काढा किया जाय । चौथाई रह जाने पर ८ सेर सरसों से तेल में डालकर फिर धीमी आँच में वह पकाया जाय । तेलमात्र रह जाने पर छानकर काम में लाएँ ।