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पातालयंत्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पातालयंत्र संज्ञा पुं॰ [सं॰ पातालबन्त्र ]

१. वह यंत्र जिसके द्वारा कडी़ ओषधियाँ पिघलाई जाती हैं या उनका तेल बनाया जाता है । विशेष—इस यंत्र में एक शीशी या मिट्टी का बरतन ऊपर और एक नीचे रहता है । दोनों के मुँह एक दूसरे से मिले रहते हैं और संधिस्थल पर कपड़मिट्टी कर दी जाती है । ऊपर की शीशी या बरतन में औषधि रहती है और उसके मुँह पर कपडे़ की ऐसी डाट लगा दी जाती है जिसमें बहुत से बारीक सूराख होते हैं । नीचे के पात्र के मुँह पर डाट नहीं रहती । फिर नीचे के पात्र को एक गढे़ में रख देते हैं और उसके गले तक मिट्टी या बालू भर देते हैं । ऊपर के पात्र को सब ओर से कंडों या उपलों से ढककर आग लगा देते हैं । इस गरमी से औषधि पिघलकर नीचे के पात्र में आ जाती है ।

२. वह यंत्र जिसमें ऊपर के पात्र में जल रहता है, नीचे के पात्र को आँच दी जाती है और बीच में रस की सिद्धि होती है ।