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पापड़ा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पापड़ा संज्ञा पुं॰ [सं॰ पर्पट]

१. छोटे आकार का एक पेड़ जो मध्यप्रदेश, बंगाल, मद्रास आदि में उत्पन्न होता है । विशेष—इसकी पत्तियाँ हर झड़कर नई निकलती हैं । इसकी लकड़ी भीतर से चिकनी, साफ और पीलापन लिए भूरे रंग की तथा कड़ी और मजबूत होती है । उससे कंघी और खराद की चीजें बनाई जाती हैं । खुटाई का काम भी उसपर अच्छा होता है । इसे वनएडालु भी कहते हैं ।

२. दे॰ 'पित्तपापड़ा' ।