पापरोग
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पापरोग संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. वह रोग जो कोई विशेष पाप करने से होता है । पापविशेष के फल से उत्पन्न रोग । विशेष—धर्मशास्त्रानुसार कुष्ठ, यक्ष्मा, कुनख, श्यावर्दत (दाँतों का काला या बदरंग होना), पीनस, पूनिवक्त्र (श्वासवायु से दुर्गंध निकलना), हीनांगता, श्वित्र, श्वेतकुष्ठ, पंगुत्व, मूकता, लोलजिह्वता, उन्माद, अपस्मार, अंधत्व, काणत्व, भ्रामर (सिर में चक्कर आना), गुल्म श्लीपद (फीलपा) आदि रोग पापरोग माने गए हैं जो ब्रह्महत्या, सुरापान, स्वर्णहरण आदि विशेष विशेष पापों के कर्ता को नरक और पशु, कीट, पतंग आदि की योनियों से पुनः मनुष्यजन्म प्राप्त करने पर होते हैं ।
२. मसूरिका । वसंत रोग । छोटी माता ।