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पामरी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पामरी ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ प्रावार] उपरना । दुपट्टा । उ॰—मोही साँवरे सजनी तब ते गृह मोको न सोहाई । द्वार अचानक होई गए री सुंदर बदनदिखाई । ओढ़े पीरी पामरी पहिरे लाल निचोल । भौहें काँट कटीलियाँ सिक कीन्हीं विन मोल ।—सूर (शब्द॰) ।

पामरी ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ पाँव + री (प्रत्य॰)] दे॰ 'पावँड़ी' । उ॰—छोटे छोटे नूपुर सो छोटे छोटे पावँन में छोटी जरकसी लसी सामरी सु पामरी ।—रघुराजसिंह (शब्द॰) ।