पावँडी़
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पावँडी़ संज्ञा स्त्री॰ [हि॰ पावँ + ड़ी (प्रत्य॰)]
१. पादत्राण । खड़ाऊँ ।
२. जूता । उ॰— सपनेहु में बर्राय के जो रे कहेगा राम । वाके पग के पावँड़ी मेरे तन को चाम । —कबीर (शब्द॰) ।
३. गोटा पट्टा बुननेवालों का एक औजार जिसे बुनते समय पैरों से दबाना पड़ता है और जिससे ताने का बादला नीचे ऊपर होता है । विशेष— यह काठ का पहरा सा होता है जिसमें दो खूटियाँ लगी रहती हैं । इन दोनों खूँटियों के बीच लोहे की एक छड़ लगी रहती है जिसमें एक एक बालिश्त लंबी, नुकीले सिरे की ५—६ लकड़ियाँ लगी रहती हैं । बादला बुनने में यह प्राय़: वही काम देता है जो करघे में राछ देती है ।