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पावँर

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शब्दसागर

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पावँर पु ^१ वि॰ [सं॰ पामर]

१. तुच्छ । खल । नीच । दुष्ट ।

२. मुर्ख । निर्बुद्बि । उ॰— (क) तुम त्रिभुवन गुरू वेद बखाना । आन जीव पावँर का जाना । —तुलसी (शब्द॰) । (ख) छुँछो मसक पवन पानी ज्यों तैसोई जन्म विकारी हो । पाखँड़ धर्म करत है नाहिन चलत तुम्हारी हो । — सूर (शब्द॰) ।

पावँर † ^२ संज्ञा पुं॰ [हि॰ पावँ] दे॰ 'पावँड़ा' । उ॰— कुंड़ल गहे सीस भुइ लावा । पावँर होउँ जहाँ पावा । —जायसी (शब्द॰) ।

पावँर ^३ संज्ञा स्त्री॰ दे॰ 'पावँड़ी' ।