पाषण्डी
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पाषंडी वि॰ [सं॰ पाषंण्डिन्]
१. पाषंड । वेदाचार । परित्यागी । वेदविरुदध मत और आचरण ग्रहण करनेवाला । झूठा मत माननेवाला । विशेष— मनुस्मृति में लिखा है कि पाषंडो, विकर्मस्थ (निषिद्ध कर्म से जीविका करनेवाला) , बैडालव्रतिक, हेतुवाद द्वारा वेदादि का खंडन करनेवाले, वकव्रती यदि अतिथि होकर आवें तो वाणी से भई उनका सत्कार न करे । अवैदिक लिंगी (वेदविरुद्ध सांप्रदायिक चिह्न धारण करनेवाले) आदि को पाषंडी कहने में तो स्मृति पुराण आदि एकमत हैं, पर पद्मपुराण आदि घोर सांप्रदायिक पुराणों में कहीं शैव और कहीं वैष्णव भी पाषंडी कहे गए हैं । जेसे पद्मपुराण में लिखा है कि 'जो कपाल भस्म और अस्थि धारण करें, जो शंख, चक्र, ऊर्ध्वपुंड्रादि न धारण करें, जो नारायण को शिव और ब्रह्मा के ही बराबर समझें...वे सब पाषंडी हैं' । दे॰ 'पाषंड' ।
२. वेश बनाकर लोगों को धोखा देने और ठगनेवाला । धर्म आदि का झूठा आडंबर खडा़ करनेवाला । ढोंगी । धूर्त ।