पिछला

विक्षनरी से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पिछला ^१ वि॰ [हिं॰ पीछा] [स्त्री॰ पिछली]

१. जो किसी वस्तु की पीठ की ओर पड़ता हो । पीछे की ओर का । 'अगला' का उलटा जैसे,—(क) इस मकान का पिछला हिस्सा कुछ कमजोर है । (ख) इस घोड़े की पिछली दोनों टाँगे खराब हैं ।

२. जो घटना स्थिति आदि के क्रम में किसी के अथवा सबके पीछे पड़ता हो । जिसके पहले या पुर्व में कुछ और हो या हो चुका हो । बाद का । अनंतर का । पहला का उलचा । जैसे,—अभियुक्त ने अपना पहला बयान तो वाप्स ले लिया , परंतु पिछले को ज्यों का त्यों रखा है ।

३. किसी वस्तु के उत्तर भाग से संबंध रखनेवाला । अंत के भाग का या अध्रांश का । पश्चा- दुवर्ती । अंत की ओर का । जैसे—(क) इस पुस्तक के पिछले प्रकरण अधिक उपादेय हैं । (ख) अपने पिछले प्रयत्नों में उन्हें वैसी सफलता नहीं हुई जैसी पहले प्रयत्नों में हुई थी । मुहा॰—पिछला पहर =दो पहर या आधी रात के बाद क ा समय । दिन अथवा रात का उत्तर काल । पिछली रात= रात्रि का उत्तर काल । रात में आधी रात के बाद का समय । पिछले काँटे =(१) परवर्ती काल में । (२) वर्तमान के ठीक पहले के समय में । उ॰— मगर, पिछले काँटे वह मानिक के घर बहुत कम आने लगी । —शराबी, पृ॰ ३९ ।

४. बीता हुआ । गत । जो भूत काल का विषय हो गया हो । पुराना । गुजरा हुआ । जैसे,—पिछली बातों को भूल जाना अच्छा होगा ।

५. सबसे निकटस्थ । भूत काल का उस भूत काल का जो वर्तमान के ठीक पहले रहा हो । गत बातों में से अंतिम या अंत की ओर का । जैसे, पिछले साल आदि । मुहा॰—पिछला दिन = वह दिन जो वर्तमान से एक दिन पहले बीता हो । पिछली रात = कल की रात । आज से एक दिन पहले बीती हुई रात । गत रात्रि । पिछली बातों पर खाक डालना= गत काल की बातों को भुला देना । बीती बात को भुला देना । बीती बात को बिसार देना । उ॰—लाडी- चलो अब पिछली बातों पर खाक डालो । —सैर कु॰, पृ॰ ३३ ।

पिछला ^२ संज्ञा पुं॰

१. पिछले दिन पढा़ हुआ पाठ । एक दिन पहले पढा़ हुआ पाठ । आमोख्ता । जैसे,—तुमको अपना पिछला दुहराने में देर लगती है । क्रि॰ प्र॰—दुहराना ।

२. बह खाना जो रोजे के दिनों में मुसलमान लोग कुछ रात रहते खाते हैं । सहरी ।

पिछला ^३ संज्ञा पुं॰ [देश॰] पछेली । हाथ में पीछे पहनने का एक आभुषण उ॰—कँगने पहुँची, मृदु पहुँचों पर, पिछला, मँझुवा, अगला क्रमतर, चुड़ियाँ, फूल की मठियाँ वर । —ग्राप्या पृ॰ ४० ।