पिठवन
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पिठवन संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पृष्टपर्णी] एक प्रसिद्ब लता जो औषध के काम में आती है । पिठौनी । पृष्ठपर्णी । विशेष—यह पश्चिम और बंगाल में अधिकता से पाई जाती है । परंतु दक्षिण में नहीं दिखाई पड़ती । इसके पत्ते छोटे गोल गोल होते है और एक एक डाँड़ी में तीन तीन लगते है । फूल गोल और सफेद होते हैं । जड़ कम मिलने के कारण इसकी लता ही प्रायः काम में लाई जाती है । वैद्यक में इसको कटु, तिक्त, उष्ण, मधुर, क्षारक, त्रिदोषनाशक, वीर्यजनक, तथा दाह, ज्वर, श्वास, तृषा, रक्तातिसार वमन, वातरक्त, व्रण और उन्माद आदि का नाशक लिखा है । पर्या॰—कंकशत्रु । कदला । कलशी । व्याष्टुक । मेखला । कोष्टुक । पच्छिका । चक्रकुत्या । चर्कपर्णी । तन्वी । धमनी । दीघिपर्णी । पृथक्पर्णी । पुश्निपर्णी । चित्रपर्णी । त्रिपर्णी । सिंहपुच्छी । गुहा । पिष्टपर्णी । लंगुली । श्रुगाल- वृंता । मेखाला । लांगुलिका । ब्रह्मापर्णा । सिंहपुष्पी । अंघ्रिपर्णी । विष्णुपर्णी । अतिगुहा । घष्टिला ।