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पितृपक्ष

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पितृपक्ष संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. कुआर या आश्विन क कृष्ण पक्ष । कुआर की कृष्ण प्रतिपदा से अमावास्या का समय । विशेष—यह पक्ष पितरों को अतिशय प्रिय माना गाया है । कहा जाता है कि इसमें उनके निमित श्राद्ध आदि करने से वे अत्यंत संतुष्ट होते हैं । इसी से इसका नाम पितृपक्ष हुआ है । प्रतिपदा से अमावास्या तक नित्य उनके निमित तिल- तर्पण और अमावास्या को पार्वणविधि से तीन पीढी़ ऊपर तक के मृत पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है । भिन्न भिन्न पूर्वजों की मृत्युतिथियों को भी उनके निमित इस पक्ष में श्राद्ध करते हैं । पर यह श्राद्ध एकोद्दिष्ट न होकर त्रेपुरुषिक ही होता है । इन पंद्रह दिनों में आहार और विहार में प्रायः अशौच के नियमों का सा पालन किया जाता है ।

२. पिता की ओर के लोग । पिता के संबंधी । पितृकुल ।