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पित्तश्लेश्मज्त्रर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पित्तश्लेश्मज्त्रर संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह ज्वर जो पित्त और कफ दोनों के प्रकोप अथवा अधिकता से हुआ हो । विशेष—मुख का कड़ुवापन, तंद्रा, मोह, खाँसी, अरुचि, तृष्णा, क्षणिक दाह और कुछ ठंढ लगना आदि इसके लक्षण हैं ।