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पिहित

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पिहित ^१ वि॰ [सं॰] छिपा हुआ ।

पिहित ^२ संज्ञा पुं॰ एक अर्थालंकार जिसमें किसी के मन का कोई भाव जानकर क्रिया द्वारा अपना भाव प्रकट करना वर्णन किया जाय । जैसे,— गैर मिसिल ठाढौ शिवा अंतरजामी नाम । प्रकट करी रिस साह को, सरजा करि न सलाम । (यहाँ शिवाजी ने औरंगजेब का उपेक्षाभाव जानकर उसे सलाम न कर अपना क्रोध प्रकट किया ।)