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पीठमर्द

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पीठमर्द संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. नायक के चार सखाओं में से एक जो वचनचातुरी से नायिका का मानमोचन करने में समर्थ हो । यह श्रृंगार रस के उद्दोपन विभाव के अंतर्गत है ।

२. वह नायक जो कुपित नायिका को प्रसन्न कर सके । मानमोचन में समर्थ नायक । विशेष—संस्कृत के अधिकांश आचार्यों ने पीठमर्द को नायक का भेद भी माना है परंतु कुछ रसाचायों ने इसकी गणना सखाओं में की है ।

२. अत्यंत धृष्ट नायक, सखा या अत्यंत ढीठ (को॰) ।

३. नृत्य की शिक्षा देनेवाला व्यक्ति । नृत्यगुरु (को॰) ।